Around 26 crore children in the world, including India, did not get school education in 2018; Poverty, discrimination and pandemic main reason behind this: UNESCO | 2018 में भारत समेत दुनिया में करीब 26 करोड़ बच्चों को स्कूली शिक्षा नहीं मिली; गरीबी और भेदभाव के साथ महामारी ने बढ़ाई मुश्किल: रिपोर्ट - Digitalarun.in

Around 26 crore children in the world, including India, did not get school education in 2018; Poverty, discrimination and pandemic main reason behind this: UNESCO | 2018 में भारत समेत दुनिया में करीब 26 करोड़ बच्चों को स्कूली शिक्षा नहीं मिली; गरीबी और भेदभाव के साथ महामारी ने बढ़ाई मुश्किल: रिपोर्ट

  • महामारी की वजह से दुनिया भर में स्कूल बंद किए गए, इससे 90% स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा
  • यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल ऑड्रे एजॉले की अपील- गरीब बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें नहीं तो समाज पिछड़ जाएगा

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Jun 23, 2020, 02:51 PM IST

पेरिस. 2018 में दुनिया के करीब 260 मिलियन (26 करोड़) बच्चों को स्कूली शिक्षा नहीं मिली। यूनाइटेड नेशन्स एजूकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत समेत दक्षिण और मध्य एशिया के कई देशों में बच्चों को इन हालात का सामना करना पड़ा। सहारा रेगिस्तान के करीब स्थित अफ्रीकी देशों में स्कूल जाने की उम्र वाले 17 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाए।

यह बच्चे शिक्षा इसलिए हासिल नहीं कर पाए क्योंकि गरीबी और समान अवसर की कमी उनकी राह में रोढ़ा बन गई।  इस साल कोरोना महामारी ने शिक्षा पर गंभीर असर डाला। महामारी की वजह से दुनियाभर में स्कूल बंद कर दिए गए। 90 प्रतिशत स्कूली बच्चे इससे प्रभावित हुए।  

गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर

ज्यादातर देशों में गरीब परिवार के बच्चों, विकलांग, प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा बुरा असर पड़ा।  लीबिया, इजिप्ट, सोमालिया और सूडान जैसे 20 उप-सहारा अफ्रीकी देशों में मुश्किल से में हालात ज्यादा खराब रहे। इन देशों में गरीब परिवारों की तुलना में अमीर परिवारों के 20% ज्यादा बच्चों की सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई हुई। अमेरिका में स्कूल नहीं जाने वाले एलीजीबीटी कम्युनिटी के बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में तीन गुना ज्यादा थे। 

स्कूली शिक्षा से दूर रहने के कई कारण
कई देशों में बच्चों को स्कूली शिक्षा से दूर ही रखा जाता है। दो अफ्रीकी देश ऐसे हैं जहां गर्भवती लड़कियों का स्कूल जाना बैन है। 117 देशों में बाल विवाह को मंजूरी दी जाती है। 20 देश ऐसे हैं जहां बच्चों से मजदूरी करवाने के नियमों में अब तक बदलाव नहीं हुआ है। दुनिया में 3.35 करोड़ लड़कियों को ऐसे स्कूल जाना पड़ता है जहां पर न तो सफाई की व्यवस्था है और न ही पीने का साफ पानी मिलता है। मध्य और पूर्वी यूरोपियन देशों में रोमा कम्युनिटी के बच्चों को आम स्कूलों में दाखिला नहीं दिया जाता। एशिया में रोहिंग्या कम्युनिटी के बच्चों के साथ यही भेदभाव होता है। 

यूनेस्काे ने कहा- गरीब बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें

यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल ऑड्रे एजॉले ने देशों से अपील की है कि वे गरीब बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें। एजॉले ने कहा- लॉकडाउन के बाद स्कूल खुलने पर ऐसे बच्चों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। मौजूदा वक्त की चुनौती है कि हम सभी को समान शिक्षा दें। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो समाज का एक बड़ा तबका पीछे रह जाएगा। 

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